Transliteration: (Qaala Rabbi bimaaa an'amta 'alaiya falan akoona zaheeral lilmujrimeen)
"कहा, 'ऐ मेरे रब! जिस तरह तूने मुझ पर एहसान फ़रमाया है, मैं कभी मुजरिमों का मददगार नहीं बनूँगा [45]।'"
हज़रत मूसा ने शुक्राने के तौर पर अहद किया कि जो कुव्वत, इल्म और इज़्ज़त अल्लाह ने उन्हें बख़्शी है, वे उसे कभी किसी काफ़िर, ज़ालिम या फ़ासिक़ की मदद में इस्तेमाल नहीं करेंगे। इससे मालूम हुआ कि ज़ालिमों की मदद करना हराम है।
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