कुरान - 28:17 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
قَالَ رَبِّ بِمَآ أَنۡعَمۡتَ عَلَيَّ فَلَنۡ أَكُونَ ظَهِيرٗا لِّلۡمُجۡرِمِينَ

Transliteration: (Qaala Rabbi bimaaa an'amta 'alaiya falan akoona zaheeral lilmujrimeen)

कहा, 'ऐ मेरे रब! जिस तरह तूने मुझ पर एहसान फ़रमाया है, मैं कभी मुजरिमों का मददगार नहीं बनूँगा [45]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 17

"कहा, 'ऐ मेरे रब! जिस तरह तूने मुझ पर एहसान फ़रमाया है, मैं कभी मुजरिमों का मददगार नहीं बनूँगा [45]।'"

[45] मुजरिमों और काफ़िरों से बेज़ारी का अहद

हज़रत मूसा ने शुक्राने के तौर पर अहद किया कि जो कुव्वत, इल्म और इज़्ज़त अल्लाह ने उन्हें बख़्शी है, वे उसे कभी किसी काफ़िर, ज़ालिम या फ़ासिक़ की मदद में इस्तेमाल नहीं करेंगे। इससे मालूम हुआ कि ज़ालिमों की मदद करना हराम है।

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