कुरान - 28:19 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
فَلَمَّآ أَنۡ أَرَادَ أَن يَبۡطِشَ بِٱلَّذِي هُوَ عَدُوّٞ لَّهُمَا قَالَ يَٰمُوسَىٰٓ أَتُرِيدُ أَن تَقۡتُلَنِي كَمَا قَتَلۡتَ نَفۡسَۢا بِٱلۡأَمۡسِۖ إِن تُرِيدُ إِلَّآ أَن تَكُونَ جَبَّارٗا فِي ٱلۡأَرۡضِ وَمَا تُرِيدُ أَن تَكُونَ مِنَ ٱلۡمُصۡلِحِينَ

Transliteration: (Falammaaa an araada ai yabtisha billazee huwa 'aduwwul lahumaa qaala yaa Moosaaa atureedu an taqtulanee kamaa qatalta nafsam bil amsi in tureedu illaaa an takoona jabbaaram fil ardi wa maa tureedu an takoona minal musliheen)

फिर जब मूसा ने चाहा कि उस शख़्स को पकड़ें जो उन दोनों का दुश्मन था [49], तो वह कहने लगा, 'ऐ मूसा! क्या तुम मुझे भी क़त्ल करना चाहते हो जैसे तुमने कल एक जान को क़त्ल कर दिया था? तुम तो बस ज़मीन में ज़ालिम (सरकश) बनना चाहते हो और सुधार करने वालों में से होना नहीं चाहते [50]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 19

"फिर जब मूसा ने चाहा कि उस शख़्स को पकड़ें जो उन दोनों का दुश्मन था [49], तो वह कहने लगा, 'ऐ मूसा! क्या तुम मुझे भी क़त्ल करना चाहते हो जैसे तुमने कल एक जान को क़त्ल कर दिया था? तुम तो बस ज़मीन में ज़ालिम (सरकश) बनना चाहते हो और सुधार करने वालों में से होना नहीं चाहते [50]!'"

[49] ज़ालिम क़िब्ती को पकड़ने का इरादा

हज़रत मूसा ने जब देखा कि क़िब्ती उस इसराईली पर ज़ुल्म कर रहा है, तो वे क़िब्ती को रोकने के लिए आगे बढ़े।

[50] कल के क़त्ल का राज़ फ़ाश होना

उस डरपोक इसराईली ने समझा कि मूसा उसे ही मारने आ रहे हैं, तो वह घबराकर चिल्ला उठा: 'क्या तुम मुझे भी वैसे ही मार डालना चाहते हो जैसे कल एक आदमी को मार दिया था!' इस तरह उस नादान ने कल के वाक़िए का सारा भेद क़िब्ती के सामने खोल दिया।

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