कुरान - 28:21 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
فَخَرَجَ مِنۡهَا خَآئِفٗا يَتَرَقَّبُۖ قَالَ رَبِّ نَجِّنِي مِنَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Fakharaja minhaa khaaa 'ifany-yataraqqab; qaala Rabbi najjinee minal qawmiz zaalimeen (section 2))

पस वे डरते हुए और चौकन्ने होकर वहाँ से निकल पड़े [53]; अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! मुझे ज़ालिम लोगों से नजात अता फ़रमा [54]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 21

"पस वे डरते हुए और चौकन्ने होकर वहाँ से निकल पड़े [53]; अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! मुझे ज़ालिम लोगों से नजात अता फ़रमा [54]।'"

[53] मिस्र से हिजरत

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम बिना किसी ज़ादे-राह (सफ़र के ख़र्च) और सवारी के पैदल ही तन्हा मिस्र से निकल पड़े और चौकसी से आगे बढ़े।

[54] ज़ालिमों से हिफ़ाज़त की दुआ

उन्होंने अपनी तमाम तवज्जोह अल्लाह की तरफ़ फेर दी और दुआ की कि ऐ रब! मुझे फ़िरऔन और उसके ज़ालिम लश्कर की पकड़ से बचा ले।

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