कुरान - 28:22 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
وَلَمَّا تَوَجَّهَ تِلۡقَآءَ مَدۡيَنَ قَالَ عَسَىٰ رَبِّيٓ أَن يَهۡدِيَنِي سَوَآءَ ٱلسَّبِيلِ

Transliteration: (Wa lammaa tawajjaha tilqaaa'a Madyana qaala 'asaa Rabbeee ai yahdiyanee Sawaaa'as Sabeel)

और जब उन्होंने मदयन का रुख़ किया [55], तो कहा, 'उम्मीद है कि मेरा रब मुझे सीधी राह की तरफ़ रहनुमाई फ़रमाएगा [56]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 22

"और जब उन्होंने मदयन का रुख़ किया [55], तो कहा, 'उम्मीद है कि मेरा रब मुझे सीधी राह की तरफ़ रहनुमाई फ़रमाएगा [56]।'"

[55] मदयन की तरफ़ रुख़

मदयन हज़रत शुऐब अलैहिस्सलाम की बस्ती थी जो मिस्र की हुकूमती हदूद से बाहर थी। हज़रत मूसा ने उसी सम्त का रुख़ किया अगरचे वे वहाँ का रास्ता न जानते थे।

[56] अल्लाह पर भरोसा और रहनुमाई की उम्मीद

उन्होंने अल्लाह की ज़ात पर कामिल भरोसा रखा कि मेरा परवरदिगार मुझे मंज़िले मक़सूद तक पहुंचने का सीधा रास्ता दिखाएगा।

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