कुरान - 28:24 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
فَسَقَىٰ لَهُمَا ثُمَّ تَوَلَّىٰٓ إِلَى ٱلظِّلِّ فَقَالَ رَبِّ إِنِّي لِمَآ أَنزَلۡتَ إِلَيَّ مِنۡ خَيۡرٖ فَقِيرٞ

Transliteration: (Fasaqaa lahumaa summa tawallaaa ilaz zilli faqaala Rabbi innee limaaa anzalta ilaiya min khairin faqeer)

तो मूसा ने उन दोनों की ख़ातिर (जानवरों को) पानी पिला दिया [62], फिर एक साए की तरफ़ हट गए और अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! तू मेरी तरफ़ जो भी भलाई (रिज़्क़ व नेमत) उतारे, मैं उसका बेहद मोहताज हूँ [63]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 24

"तो मूसा ने उन दोनों की ख़ातिर (जानवरों को) पानी पिला दिया [62], फिर एक साए की तरफ़ हट गए और अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! तू मेरी तरफ़ जो भी भलाई (रिज़्क़ व नेमत) उतारे, मैं उसका बेहद मोहताज हूँ [63]।'"

[62] कुएं से पानी निकाल कर पिलाना

हज़रत मूसा ने आगे बढ़कर कुएं पर रखा हुआ भारी पत्थर, जिसे दस आदमी मिलकर भी नहीं उठा सकते थे, अकेले ही हटा दिया और डोल भरकर उन दोनों बहनों की बकरियों को सैराब कर दिया।

[63] बारगाह-ए-इलाही में आजिज़ाना दुआ

भूख और सफ़र की थकान से निढाल होकर हज़रत मूसा एक दरख़्त के साए में बैठ गए और अल्लाह से अर्ज़ किया कि ऐ परवरदिगार! इस वक़्त तू जो भी रिज़्क़ और भलाई अता फ़रमाए, मैं उसका सख़्त मोहताज हूँ।

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