कुरान - 28:26 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
قَالَتۡ إِحۡدَىٰهُمَا يَـٰٓأَبَتِ ٱسۡتَـٔۡجِرۡهُۖ إِنَّ خَيۡرَ مَنِ ٱسۡتَـٔۡجَرۡتَ ٱلۡقَوِيُّ ٱلۡأَمِينُ

Transliteration: (Qaalat ihdaahumaa yaaa abatis taajirhu inna khaira manistaajartal qawiyyul ameen)

उन दोनों में से एक ने कहा [68], 'ऐ अब्बा जान! इन्हें मुलाज़िम रख लीजिए [69]; बेशक सबसे बेहतर मुलाज़िम जिसे आप रखें वही है जो ताक़तवर और अमानतदार हो [70]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 26

"उन दोनों में से एक ने कहा [68], 'ऐ अब्बा जान! इन्हें मुलाज़िम रख लीजिए [69]; बेशक सबसे बेहतर मुलाज़िम जिसे आप रखें वही है जो ताक़तवर और अमानतदार हो [70]।'"

[68] हज़रत सफ़ूरा की नेक तजवीज़

हज़रत शुऐब की साहिबज़ादी हज़रत सफ़ूरा ने अपने वालिद से हज़रत मूसा को मुलाज़िमत पर रखने की सिफ़ारिश की।

[69] एक मुतबर्रक इंतख़ाब

उन्होंने देखा कि घर में बूढ़े वालिद हैं और बकरियाँ चराने के लिए किसी नेक और क़ाबिल मर्द की सख़्त ज़रूरत है।

[70] क़ुव्वत और अमानतदारी के औसाफ़

उन्होंने फ़रमाया कि इनमें दो आला तरीन सिफ़ात हैं: एक जिस्मानी ताक़त (जो कुएं के भारी पत्थर को अकेले हटाने से ज़ाहिर हुई) और दूसरी अमानत व पाकीज़गी (जो रास्ते में निगाहें नीची रखने और पीछे चलने के हुक्म से साबित हुई)।

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