Transliteration: (Qaalat ihdaahumaa yaaa abatis taajirhu inna khaira manistaajartal qawiyyul ameen)
"उन दोनों में से एक ने कहा [68], 'ऐ अब्बा जान! इन्हें मुलाज़िम रख लीजिए [69]; बेशक सबसे बेहतर मुलाज़िम जिसे आप रखें वही है जो ताक़तवर और अमानतदार हो [70]।'"
हज़रत शुऐब की साहिबज़ादी हज़रत सफ़ूरा ने अपने वालिद से हज़रत मूसा को मुलाज़िमत पर रखने की सिफ़ारिश की।
उन्होंने देखा कि घर में बूढ़े वालिद हैं और बकरियाँ चराने के लिए किसी नेक और क़ाबिल मर्द की सख़्त ज़रूरत है।
उन्होंने फ़रमाया कि इनमें दो आला तरीन सिफ़ात हैं: एक जिस्मानी ताक़त (जो कुएं के भारी पत्थर को अकेले हटाने से ज़ाहिर हुई) और दूसरी अमानत व पाकीज़गी (जो रास्ते में निगाहें नीची रखने और पीछे चलने के हुक्म से साबित हुई)।
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