Transliteration: (Qaala zaalika bainee wa bainaka aiyamal ajalaini qadaitu falaa 'udwaana 'alaiya wallaahu 'alaa ma naqoolu Wakeel (section 3))
"मूसा ने कहा, 'यह बात मेरे और आपके दरमियान तय हो गई; इन दोनों मुद्दतों में से जो भी मैं पूरी कर दूँ तो मुझ पर कोई ज़्यादती न होगी [75]; और हम जो कुछ कह रहे हैं उस पर अल्लाह निगहबान (गवाह) है [76]।'"
हज़रत मूसा ने इस मुआहदे को मंज़ूर फ़रमाया कि आठ या दस साल में से जो भी मुद्दत पूरी करूँ, उसके बाद कोई मुतालबा बाक़ी न रहेगा। रिवायत में आता है कि हज़रत मूसा ने कामिल मुद्दत यानी पूरे दस साल ख़िदमत अंजाम दी।
उन्होंने इस अहद व पैमान पर अल्लाह तआला को गवाह और निगहबान ठहराया। इससे साबित हुआ कि लेन-देन और निकाह के मुआहदात को साफ़-साफ़ तय करना सुन्नत है।
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