Transliteration: (Qaala innee ureedu an unkihaka ihdab nataiya haataini 'alaaa an taajuranee samaaniya hijaj; fa in atmamta 'ashran famin 'indika wa maaa ureedu an ashuqqa 'alaik; satajiduneee in shaaa'al laahu minas saaliheen)
"उन्होंने कहा, 'मैं चाहता हूँ कि अपनी इन दो बेटियों में से एक का निकाह तुमसे इस शर्त पर कर दूँ कि तुम आठ साल मेरी ख़िदमत (मवेशी चराना) करो [71]; फिर अगर तुम दस साल पूरे कर दो [72] तो यह तुम्हारी तरफ़ से (एहसान) होगा, और मैं तुम पर मशक़्क़त नहीं डालना चाहता [73]; इंशाअल्लाह तुम मुझे नेक लोगों में से पाओगे [74]।'"
हज़रत शुऐब अलैहिस्सलाम ने हज़रत मूसा के आला अख़लाक़ से मुतास्सिर होकर अपनी बेटी हज़रत सफ़ूरा के निकाह की पेशकश फ़रमाई और महर के तौर पर आठ साल बकरियाँ चराने की ख़िदमत मुक़र्रर की।
उन्होंने फ़रमाया कि आठ साल तो लाज़िमी हैं, अलबत्ता अगर तुम अपनी ख़ुशी से दस साल पूरे कर दो तो यह तुम्हारी तरफ़ से एहसान और भलाई होगी।
उन्होंने वाज़ेह किया कि मेरा मक़सद तुम पर कोई बोझ या सख़्ती डालना नहीं, बल्कि शराफ़त और आसानी के साथ मामला तय करना है।
हज़रत शुऐब ने फ़रमाया कि तुम इंशाअल्लाह मुझे वादे का पक्का और हुस्ने सुलूक करने वाला पाओगे।
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