कुरान - 28:20 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
وَجَآءَ رَجُلٞ مِّنۡ أَقۡصَا ٱلۡمَدِينَةِ يَسۡعَىٰ قَالَ يَٰمُوسَىٰٓ إِنَّ ٱلۡمَلَأَ يَأۡتَمِرُونَ بِكَ لِيَقۡتُلُوكَ فَٱخۡرُجۡ إِنِّي لَكَ مِنَ ٱلنَّـٰصِحِينَ

Transliteration: (Wa jaaa'a rajulum min aqsal madeenati yas'aa qaala yaa Moosaaa innal mala a yaa tamiroona bika liyaqtulooka fakhruj innee laka minan naasiheen)

और शहर के आख़िरी किनारे से एक आदमी दौड़ता हुआ आया [51]; उसने कहा, 'ऐ मूसा! बेशक दरबार के सरदार तुम्हारे बारे में मशविरा कर रहे हैं कि तुम्हें क़त्ल कर दें; पस तुम यहाँ से निकल जाओ [52], बेशक मैं तुम्हारा सच्चा ख़ैरख़्वाह हूँ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 20

"और शहर के आख़िरी किनारे से एक आदमी दौड़ता हुआ आया [51]; उसने कहा, 'ऐ मूसा! बेशक दरबार के सरदार तुम्हारे बारे में मशविरा कर रहे हैं कि तुम्हें क़त्ल कर दें; पस तुम यहाँ से निकल जाओ [52], बेशक मैं तुम्हारा सच्चा ख़ैरख़्वाह हूँ।'"

[51] ख़ैरख़्वाह मोमिन की इत्तिला

यह शख़्स फ़िरऔन के ख़ानदान का एक मोमिन (हज़रत हिज़्क़ील) था जो दिल में ईमान छुपाए हुए था। जब उसे दरबार की साज़िश का पता चला तो वह छोटा रास्ता पकड़कर तेज़ी से दौड़ा हुआ आया ताकि हज़रत मूसा को बचा सके।

[52] शहर छोड़ने का मशविरा

उसने इत्तिला दी कि फ़िरऔन और उसके सरदारों ने तुम्हारे क़त्ल का फ़ैसला कर लिया है, इसलिए फ़ौरन यहाँ से हिजरत कर जाओ।

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