कुरान - 28:31 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
وَأَنۡ أَلۡقِ عَصَاكَۚ فَلَمَّا رَءَاهَا تَهۡتَزُّ كَأَنَّهَا جَآنّٞ وَلَّىٰ مُدۡبِرٗا وَلَمۡ يُعَقِّبۡۚ يَٰمُوسَىٰٓ أَقۡبِلۡ وَلَا تَخَفۡۖ إِنَّكَ مِنَ ٱلۡأٓمِنِينَ

Transliteration: (Wa an alqi 'asaaka falam maa ra aahaa tahtazzu ka annnahaa jaaannunw wallaa mudbiranw wa lam yu'aqqib; yaa Moosaa aqbil wa laa takhaf innaka minal aamineen)

'और यह कि अपना असा (लाठी) डाल दो।' फिर जब उन्होंने उसे देखा कि वह इस तरह हरकत कर रहा है जैसे कोई सांप हो [86], तो वे पीठ फेर कर भागे और पीछे मुड़कर भी न देखा [87]। (फ़रमाया गया) 'ऐ मूसा! आगे आओ और डरो मत; बेशक तुम अम्न (सलामत) रहने वालों में से हो [88]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 31

"'और यह कि अपना असा (लाठी) डाल दो।' फिर जब उन्होंने उसे देखा कि वह इस तरह हरकत कर रहा है जैसे कोई सांप हो [86], तो वे पीठ फेर कर भागे और पीछे मुड़कर भी न देखा [87]। (फ़रमाया गया) 'ऐ मूसा! आगे आओ और डरो मत; बेशक तुम अम्न (सलामत) रहने वालों में से हो [88]।'"

[86] असा का अज़दहा (सांप) बनना

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने जब अपनी लाठी ज़मीन पर डाली तो वह अल्लाह के हुक्म से एक बहुत बड़ा, भयानक और तेज़ हरकत करने वाला अज़दहा बन गई। यह कोई जादू या नज़रबंदी न थी बल्कि अल्लाह का खुला मोजिज़ा था।

[87] ब-तकाज़ा-ए-बशरियत ख़ौफ़

हज़रत मूसा ने अचानक इतने बड़े अज़दहा को अपनी तरफ़ बढ़ते देखा तो फ़ितरी और इंसानी तकाज़े के तहत डरकर पीछे हटे और मुड़कर भी न देखा। यह ख़ौफ़ नबुव्वत के मक़ाम के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि बशरियत की अलामत है।

[88] अम्न व सलामती की निदा

अल्लाह तआला ने निदा फ़रमाई कि ऐ मूसा! आगे आओ और डरो मत, तुम हमारी हिफ़ाज़त और अम्न में हो; यह सांप तुम्हें कोई नुक़सान नहीं पहुंचाएगा बल्कि यह तुम्हारी नबुव्वत की खुली दलील है।

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