Transliteration: (Wa an alqi 'asaaka falam maa ra aahaa tahtazzu ka annnahaa jaaannunw wallaa mudbiranw wa lam yu'aqqib; yaa Moosaa aqbil wa laa takhaf innaka minal aamineen)
"'और यह कि अपना असा (लाठी) डाल दो।' फिर जब उन्होंने उसे देखा कि वह इस तरह हरकत कर रहा है जैसे कोई सांप हो [86], तो वे पीठ फेर कर भागे और पीछे मुड़कर भी न देखा [87]। (फ़रमाया गया) 'ऐ मूसा! आगे आओ और डरो मत; बेशक तुम अम्न (सलामत) रहने वालों में से हो [88]।'"
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने जब अपनी लाठी ज़मीन पर डाली तो वह अल्लाह के हुक्म से एक बहुत बड़ा, भयानक और तेज़ हरकत करने वाला अज़दहा बन गई। यह कोई जादू या नज़रबंदी न थी बल्कि अल्लाह का खुला मोजिज़ा था।
हज़रत मूसा ने अचानक इतने बड़े अज़दहा को अपनी तरफ़ बढ़ते देखा तो फ़ितरी और इंसानी तकाज़े के तहत डरकर पीछे हटे और मुड़कर भी न देखा। यह ख़ौफ़ नबुव्वत के मक़ाम के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि बशरियत की अलामत है।
अल्लाह तआला ने निदा फ़रमाई कि ऐ मूसा! आगे आओ और डरो मत, तुम हमारी हिफ़ाज़त और अम्न में हो; यह सांप तुम्हें कोई नुक़सान नहीं पहुंचाएगा बल्कि यह तुम्हारी नबुव्वत की खुली दलील है।
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