Transliteration: (Usluk yadaka fee jaibika takhruj baidaaa'a min ghairi sooo'inw wadmum ilaika janaahaka minar rahbi fazaanika burhaanaani mir Rabbika ilaa Fir'awna wa mala'ih; innahum kaanoo qawman faasiqeen)
"अपना हाथ अपने गिरेबान में डालो, वह किसी ऐब (बीमारी) के बग़ैर चमकता हुआ निकलेगा [89], और ख़ौफ़ (दूर करने) के लिए अपने बाज़ू को अपनी तरफ़ समेट लो [90]; तो ये दोनों तुम्हारे रब की तरफ़ से दो खुली सनदें (मौजिज़ात) हैं [91] फ़िरऔन और उसके दरबारियों की तरफ़; बेशक वे नाफ़रमान लोग हैं [92]।'"
हज़रत मूसा का हाथ मुबारक किसी बीमारी (जैसे कोढ़ या बरसो-सफ़ेदी) के बग़ैर सूरज की तरह जगमगाता हुआ निकलता था। जब वे उसे गिरेबान से निकालते तो उसकी रौशनी से आँखें चौंधिया जाती थीं। यह सिर्फ़ दायाँ हाथ था।
फ़रमाया गया कि जब भी ख़ौफ़ महसूस हो तो अपने बाज़ू को सीने से लगा लो। यह अमल दिल की घबराहट और ख़ौफ़ को दूर करने के लिए आज भी मुजर्रब इलाज है।
असा और यदे बैज़ा—ये दोनों इब्तिदाई मोजिज़ात थे जो फ़िरऔन के पास जाने के लिए अता किए गए। बाद में सात और मोजिज़ात (जैसे तूफ़ान, टिड्डियाँ, जुएं, मेंढक, ख़ून वग़ैरा) अता फ़रमाए गए जिससे कुल नौ मोजिज़ात मुकम्मल हुए।
फ़िरऔन और उसके दरबारी इंतिहाई नाफ़रमान, ज़ालिम और झूठे थे, इसलिए उन्हें सीधी राह पर लाने के लिए इन अज़ीम मोजिज़ात की ज़रूरत थी।
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