कुरान - 28:34 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَأَخِي هَٰرُونُ هُوَ أَفۡصَحُ مِنِّي لِسَانٗا فَأَرۡسِلۡهُ مَعِيَ رِدۡءٗا يُصَدِّقُنِيٓۖ إِنِّيٓ أَخَافُ أَن يُكَذِّبُونِ

Transliteration: (Wa akhee Haaroonu huwa afsahu minnee lisaanan fa arsilhu ma'iya rid ai yusaddiquneee innee akhaafu ai yukazziboon)

और मेरा भाई हारून, वह ज़बान के एतबार से मुझसे ज़्यादा फ़सीह (साफ़ बोलने वाला) है [94], पस उसे मेरे साथ मददगार बनाकर भेज [95] ताकि वह मेरी तस्दीक़ करे; मुझे अंदेशा है कि वे मुझे झुठलाएंगे [96]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 34

"और मेरा भाई हारून, वह ज़बान के एतबार से मुझसे ज़्यादा फ़सीह (साफ़ बोलने वाला) है [94], पस उसे मेरे साथ मददगार बनाकर भेज [95] ताकि वह मेरी तस्दीक़ करे; मुझे अंदेशा है कि वे मुझे झुठलाएंगे [96]।'"

[94] हज़रत हारून अलैहिस्सलाम की फ़साहत

हज़रत हारून की ज़बान में रवानी और फ़साहत ज़्यादा थी, जबकि हज़रत मूसा की ज़बान में बचपन में अंगारा मुंह में रख लेने की वजह से हल्का सा लुक़नत का असर था।

[95] नबुव्वत में भाई की शिरकत की दुआ

हज़रत मूसा ने दुआ की कि मेरे भाई हारून को भी नबी और मेरा वज़ीर बनाकर मेरे साथ भेजा जाए ताकि वह तबलीग़-ए-दीन और दरबार-ए-फ़िरऔन में मेरी मदद करे।

[96] झुठलाए जाने का अंदेशा

फ़िरऔनी बड़े मुतकब्बिर और हठधर्म थे, इसलिए दो रसूलों का मुत्तहिद होकर जाना हुज्जत को ज़्यादा मज़बूत करने का सबब था।

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