कुरान - 28:33 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
قَالَ رَبِّ إِنِّي قَتَلۡتُ مِنۡهُمۡ نَفۡسٗا فَأَخَافُ أَن يَقۡتُلُونِ

Transliteration: (Qaala Rabbi innee qataltu minhum nafsan fa akhaafu ai yaqtuloon)

मूसा ने अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! मैंने उनके एक आदमी को क़त्ल कर दिया था, इसलिए मुझे अंदेशा है कि वे मुझे क़त्ल कर देंगे [93]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 33

"मूसा ने अर्ज़ किया, 'ऐ मेरे रब! मैंने उनके एक आदमी को क़त्ल कर दिया था, इसलिए मुझे अंदेशा है कि वे मुझे क़त्ल कर देंगे [93];"

[93] क़िसास के ख़ौफ़ का इज़हार

हज़रत मूसा ने अपनी बशरीय कमज़ोरी और हालात का इज़हार फ़रमाया कि मिस्र में मुझ से अनजाने में एक क़िब्ती का क़त्ल हो चुका है, इसलिए मुझे डर है कि पैग़ाम पहुंचाने से पहले ही वे मुझे क़त्ल न कर दें। यह बात हुक्म-ए-इलाही के इनकार के तौर पर नहीं बल्कि मदद और तदबीर तलब करने के लिए अर्ज़ की गई थी।

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