कुरान - 28:5 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
وَنُرِيدُ أَن نَّمُنَّ عَلَى ٱلَّذِينَ ٱسۡتُضۡعِفُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَنَجۡعَلَهُمۡ أَئِمَّةٗ وَنَجۡعَلَهُمُ ٱلۡوَٰرِثِينَ

Transliteration: (Wa nureedu an namunna 'alal lazeenas tud'ifoo fil ardi wa naj'alahum a'immatanw wa naj'alahumul waariseen)

और हम चाहते थे कि उन लोगों पर एहसान करें जो ज़मीन में कमज़ोर कर दिए गए थे [9], और उन्हें पेशवा (इमाम) बनाएं [10] और उन्हें ही (मुल्क व सल्तनत का) वारिस बनाएं [11]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 5

"और हम चाहते थे कि उन लोगों पर एहसान करें जो ज़मीन में कमज़ोर कर दिए गए थे [9], और उन्हें पेशवा (इमाम) बनाएं [10] और उन्हें ही (मुल्क व सल्तनत का) वारिस बनाएं [11];"

[9] मज़लूमों पर इलाही रहमत व एहसान

अल्लाह तआला का यह दस्तूर है कि जब ज़ालिम का ज़ुल्म हद से बढ़ जाता है तो अल्लाह की रहमत मज़लूमों की दस्तगीरी फ़रमाती है। अल्लाह ने इरादा फ़रमाया कि बनी इसराईल को फ़िरऔन की ग़ुलामी और ज़ुल्म से नजात अता फ़रमाए।

[10] कमज़ोरों को पेशवा और रहनुमा बनाना

जिन्हें दुनिया में हक़ीर और कमज़ोर समझा जाता था, अल्लाह ने उन्हें दीन व दुनिया का इमाम, पेशवा और नबी व बादशाह बनाने का फ़ैसला फ़रमाया।

[11] मुल्क व दौलत का वारिस बनाना

अल्लाह तआला ने मिस्र और शाम की सरज़मीन और फ़िरऔनियों के ख़ज़ानों का वारिस उन्हीं मज़लूम इसराईली ग़ुलामों को बना दिया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now