Transliteration: (Wa awhainaaa ilaaa ummi Moosaaa an ardi'eehi faizaa khifti 'alaihi fa alqeehi filyammi wa laa takhaafee wa laa tahzaneee innaa raaaddoohu ilaiki wa jaa'iloohu minal mursaleen)
"और हमने मूसा की माँ के दिल में इलहाम फ़रमाया [14] कि 'इसे दूध पिलाओ [15], फिर जब तुम्हें उस पर ख़तरा महसूस हो तो उसे दरिया (नील) में डाल दो [16], और न डरो [17] और न ग़म करो; बेशक हम उसे तुम्हारी तरफ़ वापस लौटाएंगे और उसे पैग़म्बरों में से बनाएंगे [18]।'"
यहाँ 'वही' से मुराद नबुव्वत की वही नहीं, बल्कि इलहाम है जो अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा की वालिदा माजिदा के दिल में डाला ताकि शदीद ख़ौफ़ के आलम में उनका दिल मुतमइन रहे और वे सही फ़ैसला कर सकें।
उन्हें हुक्म हुआ कि जब तक कोई ख़तरा न हो मूसा को अपना दूध पिलाती रहें ताकि माँ-बेटे का फ़ितरी रिश्ता और बच्चे की नशोनुमा बरक़रार रहे।
जब फ़िरऔन के जासूसों का ख़ौफ़ हुआ तो अल्लाह ने हुक्म दिया कि बच्चे को संदूक़ में रखकर दरिया-ए-नील की मौजों के हवाले कर दो। यह ज़ाहिर में हलाकत की जगह थी मगर हक़ीक़त में अल्लाह की पनाह थी।
अल्लाह ने उन्हें तसल्ली दी कि न बच्चे के डूबने का डर रखो और न उसकी जुदाई का ग़म करो, क्योंकि वह अल्लाह की हिफ़ाज़त में है।
अल्लाह तआला ने दो अज़ीम वादे फ़रमाए: पहला यह कि मूसा तुम्हारी गोद में वापस लौटाए जाएंगे, और दूसरा यह कि वे बड़े होकर अल्लाह के जलीलुल-क़द्र रसूल बनेंगे।
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