कुरान - 28:7 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰٓ أُمِّ مُوسَىٰٓ أَنۡ أَرۡضِعِيهِۖ فَإِذَا خِفۡتِ عَلَيۡهِ فَأَلۡقِيهِ فِي ٱلۡيَمِّ وَلَا تَخَافِي وَلَا تَحۡزَنِيٓۖ إِنَّا رَآدُّوهُ إِلَيۡكِ وَجَاعِلُوهُ مِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

Transliteration: (Wa awhainaaa ilaaa ummi Moosaaa an ardi'eehi faizaa khifti 'alaihi fa alqeehi filyammi wa laa takhaafee wa laa tahzaneee innaa raaaddoohu ilaiki wa jaa'iloohu minal mursaleen)

और हमने मूसा की माँ के दिल में इलहाम फ़रमाया [14] कि 'इसे दूध पिलाओ [15], फिर जब तुम्हें उस पर ख़तरा महसूस हो तो उसे दरिया (नील) में डाल दो [16], और न डरो [17] और न ग़म करो; बेशक हम उसे तुम्हारी तरफ़ वापस लौटाएंगे और उसे पैग़म्बरों में से बनाएंगे [18]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 7

"और हमने मूसा की माँ के दिल में इलहाम फ़रमाया [14] कि 'इसे दूध पिलाओ [15], फिर जब तुम्हें उस पर ख़तरा महसूस हो तो उसे दरिया (नील) में डाल दो [16], और न डरो [17] और न ग़म करो; बेशक हम उसे तुम्हारी तरफ़ वापस लौटाएंगे और उसे पैग़म्बरों में से बनाएंगे [18]।'"

[14] मूसा की वालिदा को इलहाम-ए-इलाही

यहाँ 'वही' से मुराद नबुव्वत की वही नहीं, बल्कि इलहाम है जो अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा की वालिदा माजिदा के दिल में डाला ताकि शदीद ख़ौफ़ के आलम में उनका दिल मुतमइन रहे और वे सही फ़ैसला कर सकें।

[15] बच्चे को दूध पिलाना

उन्हें हुक्म हुआ कि जब तक कोई ख़तरा न हो मूसा को अपना दूध पिलाती रहें ताकि माँ-बेटे का फ़ितरी रिश्ता और बच्चे की नशोनुमा बरक़रार रहे।

[16] ख़तरे के वक़्त दरिया में डालना

जब फ़िरऔन के जासूसों का ख़ौफ़ हुआ तो अल्लाह ने हुक्म दिया कि बच्चे को संदूक़ में रखकर दरिया-ए-नील की मौजों के हवाले कर दो। यह ज़ाहिर में हलाकत की जगह थी मगर हक़ीक़त में अल्लाह की पनाह थी।

[17] ख़ौफ़ और ग़म से अमन

अल्लाह ने उन्हें तसल्ली दी कि न बच्चे के डूबने का डर रखो और न उसकी जुदाई का ग़म करो, क्योंकि वह अल्लाह की हिफ़ाज़त में है।

[18] वापसी और नबुव्वत की दोहरी बशारत

अल्लाह तआला ने दो अज़ीम वादे फ़रमाए: पहला यह कि मूसा तुम्हारी गोद में वापस लौटाए जाएंगे, और दूसरा यह कि वे बड़े होकर अल्लाह के जलीलुल-क़द्र रसूल बनेंगे।

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