कुरान - 28:6 सूरह अल-क़सस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
وَنُمَكِّنَ لَهُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَنُرِيَ فِرۡعَوۡنَ وَهَٰمَٰنَ وَجُنُودَهُمَا مِنۡهُم مَّا كَانُواْ يَحۡذَرُونَ

Transliteration: (Wa numakkina lahum fil ardi wa nuriya Fir'awna wa Haamaana wa junoodahumaa minhum maa kaanoo yahzaroon)

और उन्हें ज़मीन में इक़्तेदार (ताक़त) बख़्शें [12], और फ़िरऔन, हामान और उनके लश्करों को वही कुछ दिखा दें जिसका उन्हें ख़तरा था [13]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़सस आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-क़सस तफ़सीर - आयत 6

"और उन्हें ज़मीन में इक़्तेदार (ताक़त) बख़्शें [12], और फ़िरऔन, हामान और उनके लश्करों को वही कुछ दिखा दें जिसका उन्हें ख़तरा था [13]।"

[12] ज़मीन में इक़्तेदार व सल्तनत का क़ियाम

अल्लाह तआला ने बनी इसराईल को सिर्फ़ आज़ादी ही नहीं दी, बल्कि उन्हें मुल्क का हुक्मरान और साहिब-ए-इक़्तेदार बनाया।

[13] फ़िरऔन के ख़ौफ़ का हक़ीक़त बनना

फ़िरऔन और उसके वज़ीर हामान को जिस बात का डर था कि कोई इसराईली उनकी सल्तनत को बर्बाद न कर दे, अल्लाह ने उसी ख़ौफ़ को उनके सामने ला खड़ा किया और जिस बच्चे के ख़ौफ़ से हज़ारों मासूम क़त्ल किए गए थे, उसी के ज़रिए उनकी सल्तनत को ग़र्क़ कर दिया।

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