Transliteration: (Laa baaridinw wa laa kareem)
"जो न ठंडा है और न बा-इज़्ज़त!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि दुनिया में दरख़्त का साया ठंडा और सुकूनदेह होता है, मगर जहन्नम के धुएँ का साया न ठंडक बख़्शेगा और न उसमें कोई इज़्ज़त होगी, बल्कि वह दम घोंटने वाला और ज़िल्लत-आमेज़ होगा।
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