कुरान - 56:44 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
لَّا بَارِدٖ وَلَا كَرِيمٍ

Transliteration: (Laa baaridinw wa laa kareem)

जो न ठंडा है और न बा-इज़्ज़त! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 44

"जो न ठंडा है और न बा-इज़्ज़त!"


ज़िल्लत और तकलीफ़ का साया

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि दुनिया में दरख़्त का साया ठंडा और सुकूनदेह होता है, मगर जहन्नम के धुएँ का साया न ठंडक बख़्शेगा और न उसमें कोई इज़्ज़त होगी, बल्कि वह दम घोंटने वाला और ज़िल्लत-आमेज़ होगा।

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