कुरान - 56:46 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
وَكَانُواْ يُصِرُّونَ عَلَى ٱلۡحِنثِ ٱلۡعَظِيمِ

Transliteration: (Wa kaanoo yusirroona 'alal hinsil 'azeem)

और बड़े भारी गुनाह (शिर्क व कुफ़्र) पर अड़े रहते थे [42]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 46

"और बड़े भारी गुनाह (शिर्क व कुफ़्र) पर अड़े रहते थे [42]!"


[42] 'हिनसुल अज़ीम' यानी शिर्क व कुफ़्र पर इसरार

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'हिनसुल अज़ीम' से मुराद शिर्क और कुफ़्र है जो तमाम गुनाहों में सबसे बड़ा गुनाह है। वे अपनी हठधर्मी और तकब्बुर में ज़िंदगी भर कुफ़्र पर जमे रहे और तौबा न की।

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