Transliteration: (Wa kaanoo yusirroona 'alal hinsil 'azeem)
"और बड़े भारी गुनाह (शिर्क व कुफ़्र) पर अड़े रहते थे [42]!"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'हिनसुल अज़ीम' से मुराद शिर्क और कुफ़्र है जो तमाम गुनाहों में सबसे बड़ा गुनाह है। वे अपनी हठधर्मी और तकब्बुर में ज़िंदगी भर कुफ़्र पर जमे रहे और तौबा न की।
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