Transliteration: (Wa kaanoo yaqooloona a'izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa izaaman'ainnaa lamab'oosoon)
"और कहा करते थे: 'क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या हम ज़रूर दोबारा उठाए जाएँगे [43]?'"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िर क़यामत और हश्र का मज़ाक़ उड़ाने और इंकार करने के लिए यह सवाल करते थे कि जब हमारा जिस्म गल-सड़ कर मिट्टी हो जाएगा तो हमें दोबारा कैसे ज़िंदा किया जा सकता है?
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