कुरान - 56:47 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
وَكَانُواْ يَقُولُونَ أَئِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابٗا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبۡعُوثُونَ

Transliteration: (Wa kaanoo yaqooloona a'izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa izaaman'ainnaa lamab'oosoon)

और कहा करते थे: "क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या हम ज़रूर दोबारा उठाए जाएँगे [43]?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 47

"और कहा करते थे: 'क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या हम ज़रूर दोबारा उठाए जाएँगे [43]?'"


[43] दोबारा ज़िंदा किए जाने का इंकार और मज़ाक़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि काफ़िर क़यामत और हश्र का मज़ाक़ उड़ाने और इंकार करने के लिए यह सवाल करते थे कि जब हमारा जिस्म गल-सड़ कर मिट्टी हो जाएगा तो हमें दोबारा कैसे ज़िंदा किया जा सकता है?

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