कुरान - 56:45 सूरह अल-वाक़िया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَبۡلَ ذَٰلِكَ مُتۡرَفِينَ

Transliteration: (Innahum kaanoo qabla zaalika mutrafeen)

बेशक वे इससे पहले नाज़ व नेमत में पड़े थे [41]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-वाक़िया आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-वाक़िआ तफ़सीर - आयत 45

"बेशक वे इससे पहले नाज़ व नेमत में पड़े थे [41]!"


[41] नेमतों की नाशुक्रगुज़ारी और अज़ाब का सबब

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि दुनिया में वे अल्लाह की दी हुई दौलत, सेहत और ऐशो-इशरत में मस्त होकर रब को भूल गए थे और नाशुक्रापन दिखाते थे। जब नेमतों का शुक्र अदा न किया जाए तो वे अज़ाब की शक्ल इख़्तियार कर लेती हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now