कुरान - 16:115 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

115
إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيۡكُمُ ٱلۡمَيۡتَةَ وَٱلدَّمَ وَلَحۡمَ ٱلۡخِنزِيرِ وَمَآ أُهِلَّ لِغَيۡرِ ٱللَّهِ بِهِۦۖ فَمَنِ ٱضۡطُرَّ غَيۡرَ بَاغٖ وَلَا عَادٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ

Transliteration: (Innamaa harama 'alai kumul maitata waddama wa lahmal khinzeeri wa maaa uhilla lighairil laahi bihee famanid turra ghaira baaghinw wa laa 'aadin fa innal laaha Ghafoorur Raheem)

उसने तुम पर हराम फ़रमाया है [255] सिर्फ़ मुरदार [256], और ख़ून [257], और सूअर का गोश्त [258], और वह जानवर जिस पर ज़बह के वक़्त अल्लाह के सिवा किसी और का नाम पुकारा गया हो [259]। फिर जो मजबूर हो जाए, न सरकशी करता हो और न हद से बढ़ता हो [260], तो बेशक अल्लाह बख़्शने वाला मेहरबान है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 115 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 115 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"उसने तुम पर हराम फ़रमाया है [255] सिर्फ़ मुरदार [256], और ख़ून [257], और सूअर का गोश्त [258], और वह जानवर जिस पर ज़बह के वक़्त अल्लाह के सिवा किसी और का नाम पुकारा गया हो [259]... [260]।"

[255] हराम चीज़ों का शरई उसूल

बुनियादी तौर पर हर चीज़ हलाल है सिवाय उन चीज़ों के जिन्हें क़ुरआन व हदीस ने साफ़ तौर पर हराम फ़रमाया है।

[256] मुरदार का हुक्म

जो जानवर बिना शरई ज़बह के मर जाए वह हराम है; अलबत्ता मछली और टिड्डी ज़बह के बिना भी हलाल हैं।

[257] बहता हुआ ख़ून

दम-ए-मस्फ़ूह़ (बहता ख़ून) हराम है; कलेजी और तिल्ली ख़ून जैसी होने के बावजूद हलाल हैं।

[258] सूअर का गोश्त

सूअर का गोश्त, चर्बी, बाल और उसकी हर चीज़ क़तई हराम और नजिसुल-ऐन है।

[259] ग़ैर-अल्लाह के नाम पर ज़बह

ज़बह के वक़्त जानबूझकर किसी बुत या ग़ैर-अल्लाह का नाम पुकारना उस जानवर को हराम कर देता है।

[260] इज़्तिरार (शदीद मजबूरी) की रुख़्सत

अगर जान जाने का ख़तरा हो और हलाल ग़िज़ा बिल्कुल न मिले, तो जान बचाने की हद तक हराम चीज़ खाने की रुख़्सत है, मगर ज़रूरत से ज़्यादा खाना हराम रहेगा।

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