Transliteration: (Wa laa taqooloo limaa tasifu alsinatukumul kaziba haaza halaalunw wa haazaa haraamul litaftaroo 'alal laahil kazib; innal lazeena yaftaroona 'alal laahil kaziba laa yuflihoon)
"और अपनी ज़बानों के झूठे बयान के सबब यह न कह दिया करो: 'यह हलाल है [260] और यह हराम है,' ताकि अल्लाह पर झूठ बाँधो... [261]।"
हलाल और हराम करना सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का इख़्तियार है। अपनी ज़बान से बिना शरई दलील के किसी हलाल चीज़ को हराम या हराम को हलाल कहना अल्लाह पर बोहतान बाँधना है।
जो लोग बिना दलील के मुस्तहसन दीनी उमूर (जैसे मिलाद शरीफ़, फ़ातिहा व नियाज़) को हराम कहते हैं, वे इसी बोहतान के मुर्तकिब होते हैं। शरीअत में अस्ल इबाहत (हलाल होना) है जब तक कि मनाही की दलील न हो।
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