कुरान - 16:114 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

114
فَكُلُواْ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُ حَلَٰلٗا طَيِّبٗا وَٱشۡكُرُواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ إِن كُنتُمۡ إِيَّاهُ تَعۡبُدُونَ

Transliteration: (Fakuloo mimmaa razaqa kumul laahu halaalan taiyibanw washkuroo ni'matal laahi in kuntum iyyaahu ta'budoon)

तो खाओ अल्लाह के दिए हुए रिज़्क़ में से जो हलाल पाकीज़ा है [253], और अल्लाह की नेमत का शुक्र अदा करो अगर तुम उसी की इबादत करते हो [254]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 114 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 114 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"तो खाओ अल्लाह के दिए हुए रिज़्क़ में से जो हलाल पाकीज़ा है [253], और अल्लाह की नेमत का शुक्र अदा करो अगर तुम उसी की इबादत करते हो [254]।"

[253] हलाल और तय्यिब ग़िज़ा का हुक्म

मोमिनीन को हुक्म है कि हलाल और पाकीज़ा रिज़्क़ खाएँ। लज़ीज़ और अच्छी नेमतें खाना तक़वा के ख़िलाफ़ नहीं है, बल्कि असल परहेज़गारी हराम माल (जैसे रिश्वत, सूद, चोरी) और हराम ग़िज़ा से बचना है।

[254] अक़ीदा, अमल और ज़बान से शुक्र

अल्लाह का शुक्र तीन तरीक़ों से होता है: दिल से तौहीद व रिसालत मानना, आमाल से शरीअत की इताअत करना, और ज़बान से अल्लाह की हम्द और रसूलुल्लाह ﷺ की नात व दुरूद पढ़ना।

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