Transliteration: (Wa darabal laahu masalan qaryatan kaanat aaminatam mutma'innatany yaaateehaa rizquhaa raghadam min kulli makaanin fakafarat bi an'umil laahi fa azaaqahal laahu libaasal joo'i walkhawfi bimaa kaanoo yasna'oon)
"और अल्लाह ने एक बस्ती की मिसाल बयान फ़रमाई, जो अमन व चैन में थी... तो अल्लाह ने उनके करतूतों के बदले उन्हें भूख और ख़ौफ़ का लिबास चखा दिया [249] [250]।"
मक्का मुअज़्ज़मा हरम की बरकत से अमन व सुकून और रिज़्क़ की फ़राख़ी का गहवारा था; मगर अहले-मक्का ने हुज़ूर अकरम ﷺ को झुठलाया और ना-शुक्री की। चुनाँचे उन पर सात साल का ऐसा शदीद क़हत पड़ा कि वे मुरदार खाने पर मजबूर हो गए और मुसलमानों के ग़लबे का ख़ौफ़ उन पर मुसल्लत हो गया।
ना-शुक्री की सज़ा दुनिया में भी नमूदार होती है ताकि लोग इबरत पकड़ें, मगर यह दुनियावी तकलीफ़ मुकम्मल सज़ा नहीं है; अस्ल और पूरा हिसाब-किताब आख़िरत में होगा।
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