कुरान - 16:113 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

113
وَلَقَدۡ جَآءَهُمۡ رَسُولٞ مِّنۡهُمۡ فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمُ ٱلۡعَذَابُ وَهُمۡ ظَٰلِمُونَ

Transliteration: (Wa laqad jaaa'ahum Rasoolum minhum fakazzaboohu fa akhazahumul 'azaabu wa hum zaalimoon)

और बेशक उनके पास उन्हीं में से एक रसूल आया, तो उन्होंने उसे झुठलाया। तो अज़ाब ने उन्हें आ पकड़ा [251] इस हाल में कि वे ज़ालिम थे [252]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 113 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 113 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और बेशक उनके पास उन्हीं में से एक रसूल आया, तो उन्होंने उसे झुठलाया। तो अज़ाब ने उन्हें आ पकड़ा [251] इस हाल में कि वे ज़ालिम थे [252]।"

[251] अपने ही नबी को झुठलाने का वबाल

हुज़ूर अकरम ﷺ कुरैश ही के ख़ानदान से थे जिनके पाक अख़्लाक़ और सच्चाई को वे बचपन से जानते थे; फिर भी उन्होंने आपको झुठलाया जिसके नतीजे में क़हत और ज़िल्लत के अज़ाब ने उन्हें घेर लिया।

[252] नबी करीम ﷺ की शान में गुस्ताख़ी ज़ुल्म है

हुज़ूर ﷺ को जादूगर और शायर कहना खुला ज़ुल्म और तकब्बुर था।

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