कुरान - 16:111 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

111
۞يَوۡمَ تَأۡتِي كُلُّ نَفۡسٖ تُجَٰدِلُ عَن نَّفۡسِهَا وَتُوَفَّىٰ كُلُّ نَفۡسٖ مَّا عَمِلَتۡ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ

Transliteration: (Yawma taatee kullu nafsin tujaadilu 'an nafsihaa wa tuwaffaa kullu nafsim maa 'amilat wa hum laa yuzlamoon)

जिस दिन हर जान अपनी ही तरफ़ से झगड़ती आएगी; और हर जान को उसके किए का पूरा बदला दिया जाएगा और उन पर ज़ुल्म न होगा [248]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 111 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 111 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"जिस दिन हर जान अपनी ही तरफ़ से झगड़ती आएगी; और हर जान को उसके किए का पूरा बदला दिया जाएगा और उन पर ज़ुल्म न होगा [248]।"

[248] रूह और जिस्म की आपस में तकरार और अद्ल-ए-इलाही

हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि क़यामत के दिन काफ़िर का जिस्म और रूह आपस में झगड़ेंगे। जिस्म कहेगा: "मैं तो बेजान था, रूह ने आकर मुझसे गुनाह करवाए।" रूह कहेगी: "मैं तो अपंग थी, हाथ-पाँव जिस्म के थे जिसने गुनाह किए।" अल्लाह तआला मिसाल फ़रमाएगा कि एक लँगड़ा आदमी अंधे के कन्धों पर सवार होकर चोरी करे, तो दोनों मुजरिम हैं — रूह लँगड़ी है और जिस्म अंधा, दोनों मिलकर गुनाहगार बने और दोनों दोज़ख़ में जाएँगे (ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)।

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