Transliteration: (Summa inna Rabbaka lillazeena haajaroo mim ba'dimaa futinoo summma jaahadoo wa sabaroo inna Rabbaka mim ba'dihaa la Ghafoorur Raheem (section 14))
"फिर बेशक आपका रब उनके लिए जिन्होंने सताए जाने के बाद हिजरत की [246]... बेशक आपका रब इसके बाद ज़रूर बख़्शने वाला मेहरबान है [247]।"
यह आयत हज़रत अम्मर बिन यासिर, हज़रत बिलाल और हज़रत ख़ब्बाब (रज़ियल्लाहु अन्हुम) जैसे साबिर और मुजाहिद सहाबा के हक़ में नाज़िल हुई जिन्होंने अज़ीयतें बर्दाश्त करने के बाद हिजरत फ़रमाई और राह-ए-ख़ुदा में जिहाद किया।
अल्लाह तआला ने उनके सब्र, हिजरत और जिहाद की बरकत से उनके तमाम पिछले गुनाह माफ़ फ़रमा दिए और उन पर अपनी ख़ास रहमतों का दरवाज़ा खोल दिया।
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