कुरान - 16:110 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

110
ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ هَاجَرُواْ مِنۢ بَعۡدِ مَا فُتِنُواْ ثُمَّ جَٰهَدُواْ وَصَبَرُوٓاْ إِنَّ رَبَّكَ مِنۢ بَعۡدِهَا لَغَفُورٞ رَّحِيمٞ

Transliteration: (Summa inna Rabbaka lillazeena haajaroo mim ba'dimaa futinoo summma jaahadoo wa sabaroo inna Rabbaka mim ba'dihaa la Ghafoorur Raheem (section 14))

फिर बेशक आपका रब उनके लिए जिन्होंने सताए जाने के बाद हिजरत की [246], फिर जिहाद किया और सब्र किया; बेशक आपका रब इसके बाद ज़रूर बख़्शने वाला मेहरबान है [247]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 110 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 110 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"फिर बेशक आपका रब उनके लिए जिन्होंने सताए जाने के बाद हिजरत की [246]... बेशक आपका रब इसके बाद ज़रूर बख़्शने वाला मेहरबान है [247]।"

[246] मुहाजिरीन-ए-किराम की अज़मत

यह आयत हज़रत अम्मर बिन यासिर, हज़रत बिलाल और हज़रत ख़ब्बाब (रज़ियल्लाहु अन्हुम) जैसे साबिर और मुजाहिद सहाबा के हक़ में नाज़िल हुई जिन्होंने अज़ीयतें बर्दाश्त करने के बाद हिजरत फ़रमाई और राह-ए-ख़ुदा में जिहाद किया।

[247] मग़फ़िरत और रहमत का मुज़्हदा

अल्लाह तआला ने उनके सब्र, हिजरत और जिहाद की बरकत से उनके तमाम पिछले गुनाह माफ़ फ़रमा दिए और उन पर अपनी ख़ास रहमतों का दरवाज़ा खोल दिया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now