Transliteration: (Illahukum Ilaahunw Waahid; fallazeena laa yu'minoona bil Aakhirati quloobuhum munkiratunw wa hum mustakbiroon)
"तुम्हारा माबूद एक ही माबूद है [41]। तो जो आख़िरत पर ईमान नहीं लाते उनके दिल मुनकिर हैं और वे सरकश हैं [42]।"
अल्लाह तआला अपनी ज़ात और सिफ़ात में एक (ला-शरीक) है। न कोई उसकी ज़ात में शरीक है और न उसकी ख़ास खुदाई सिफ़ात (जैसे अज़लियत, अबदियत, वाजिबुल-वजूद होना) में कोई उसका साझीदार है।
जो लोग आख़िरत और हिसाब-किताब का इनकार करते हैं, उनके इनकार की अस्ल वजह तकब्बुर और घमंड है। वे हक़ के आगे झुकना अपनी शान के ख़िलाफ़ समझते हैं।
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