कुरान - 16:22 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
إِلَٰهُكُمۡ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۚ فَٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ قُلُوبُهُم مُّنكِرَةٞ وَهُم مُّسۡتَكۡبِرُونَ

Transliteration: (Illahukum Ilaahunw Waahid; fallazeena laa yu'minoona bil Aakhirati quloobuhum munkiratunw wa hum mustakbiroon)

तुम्हारा माबूद एक ही माबूद है [41]। तो जो आख़िरत पर ईमान नहीं लाते उनके दिल मुनकिर हैं और वे सरकश (घमंडी) हैं [42]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 22 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"तुम्हारा माबूद एक ही माबूद है [41]। तो जो आख़िरत पर ईमान नहीं लाते उनके दिल मुनकिर हैं और वे सरकश हैं [42]।"

[41] ज़ात व सिफ़ात में तौहीद

अल्लाह तआला अपनी ज़ात और सिफ़ात में एक (ला-शरीक) है। न कोई उसकी ज़ात में शरीक है और न उसकी ख़ास खुदाई सिफ़ात (जैसे अज़लियत, अबदियत, वाजिबुल-वजूद होना) में कोई उसका साझीदार है।

[42] तकब्बुर इनकार की जड़

जो लोग आख़िरत और हिसाब-किताब का इनकार करते हैं, उनके इनकार की अस्ल वजह तकब्बुर और घमंड है। वे हक़ के आगे झुकना अपनी शान के ख़िलाफ़ समझते हैं।

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