कुरान - 16:23 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
لَا جَرَمَ أَنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعۡلِنُونَۚ إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُسۡتَكۡبِرِينَ

Transliteration: (Laa jarama annal laaha ya'lamu maa yusirrona wa ma yu'linoon; innahoo laa yuhibbul mustakbireen)

फ़िल-हक़ीक़त अल्लाह जानता है जो कुछ वे छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं [43]। बेशक वह घमंडियों को पसन्द नहीं फ़रमाता [44]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 23 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"फ़िल-हक़ीक़त अल्लाह जानता है जो कुछ वे छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं [43]। बेशक वह घमंडियों को पसन्द नहीं फ़रमाता [44]।"

[43] ज़ाहिर व बातिन की पाकीज़गी

इन्सान को अपने ज़ाहिर और बातिन दोनों को गुनाहों से साफ़ रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह तआला पर कोई भेद छुपा हुआ नहीं है।

[44] तकब्बुर अल्लाह की बारगाह में मबग़ूज़

अल्लाह तआला घमंडी इन्सान को नापसन्द फ़रमाता है। हदीस शरीफ़ में है कि जिसके दिल में राई के दाने बराबर भी तकब्बुर होगा, वह जन्नत की ख़ुशबू भी न पाएगा।

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