कुरान - 16:25 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
لِيَحۡمِلُوٓاْ أَوۡزَارَهُمۡ كَامِلَةٗ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَمِنۡ أَوۡزَارِ ٱلَّذِينَ يُضِلُّونَهُم بِغَيۡرِ عِلۡمٍۗ أَلَا سَآءَ مَا يَزِرُونَ

Transliteration: (Liyahmilooo awzaarahum kaamilatany Yawmal Qiyaamati wa min awzaaril lazeena yudilloonahum bighairi 'ilm; alaa saaa'a maa yaziroon (section 3))

ताकि वे क़यामत के दिन अपने पूरे बोझ उठाएँ [47], और कुछ बोझ उन लोगों के भी जिन्हें वे बे-समझे गुमराह करते हैं [48]। सुन लो! कितना बुरा बोझ वे उठा रहे हैं [49]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 25 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"ताकि वे क़यामत के दिन अपने पूरे बोझ उठाएँ [47], और कुछ बोझ उन लोगों के भी जिन्हें वे बे-समझे गुमराह करते हैं [48]। सुन लो! कितना बुरा बोझ वे उठा रहे हैं [49]!"

[47] काफ़िरों का पूरा मुकम्मल वबाल

काफ़िर और मुज़िल्लीन (गुमराह करने वाले) क़यामत के दिन अपने गुनाहों का पूरा बोझ उठाएँगे, उन्हें कोई माफ़ी या तख़्फ़ीफ़ न मिलेगी; जबकि गुनहगार मोमिनों के बहुत से गुनाह अल्लाह की रहमत और शफ़ाअत से माफ़ हो जाएँगे।

[48] दूसरों को भटकाने का वबाल

जो लोग झूठे प्रचार से दूसरों को गुमराह करते हैं, वे अपने गुनाहों के साथ-साथ अपने पैरवीकारों के गुनाहों का बोझ भी उठाएँगे। इसी तरह नेक उलमा और राहनुमाओं को अपनी नेकियों के साथ-साथ उनकी नेकियों का सवाब भी मिलता है जो उनके ज़रिए हिदायत पाए।

[49] ज़बरदस्ती लादा जाने वाला अज़ाब

यह गुनाहों का बोझ वे अपनी ख़ुशी से नहीं बल्कि ज़बरदस्ती अज़ाब के तौर पर लादे जाएँगे; यह कितना बुरा और दर्दनाक बोझ है।

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