Transliteration: (Summa Yawmal Qiyaamati yukhzeehim wa yaqoolu aina shurakaaa'iyal lazeena kuntum tushaaaqqoona feehim; qaalal lazeena ootul 'ilma innal khizyal Yawma wassooo'a 'alal kaafireen)
"फिर क़यामत के दिन वह उन्हें रुसवा करेगा [52] और फ़रमाएगा, 'कहाँ हैं मेरे वे शरीक जिनके लिए तुम झगड़ते थे [53]?' वे इल्म वाले कहेंगे, 'आज सारी रुसवाई और अज़ाब काफ़िरों पर है [54]।'"
दुनियावी अज़ाब काफ़िरों के आख़िरत के अज़ाब को कम नहीं करता। इसके अलावा गुनहगार मोमिनों की सज़ा पर्दे में होगी, उन्हें काफ़िरों की तरह खुले मैदान में रुसवा नहीं किया जाएगा।
अल्लाह तआला मुशरिक़ीन को डाँटते हुए फ़रमाएगा कि तुम्हारे वे गढ़े हुए झूठे माबूद कहाँ हैं? याद रहे कि इसमें अम्बिया और औलिया शामिल नहीं हैं, क्योंकि मोमिनीन उन्हें माबूद नहीं मानते बल्कि अल्लाह के इज़्न से शफ़ीअ (सिफ़ारशी) मानते हैं।
अहले-इल्म (अम्बिया, औलिया और हक़्क़ानी उलमा) क़यामत के दिन गवाही देंगे कि आज सारी ज़िल्लत और अज़ाब काफ़िरों के हिस्से में है। अल्लाह ने उनके क़ौल को अपनी वही में ज़िक्र करके अहले-इल्म को अज़ीम शरफ़ बख़्शा है।
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