कुरान - 16:28 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
ٱلَّذِينَ تَتَوَفَّىٰهُمُ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةُ ظَالِمِيٓ أَنفُسِهِمۡۖ فَأَلۡقَوُاْ ٱلسَّلَمَ مَا كُنَّا نَعۡمَلُ مِن سُوٓءِۭۚ بَلَىٰٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمُۢ بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Allazeena tatawaf faahu mul malaaa'ikatu zaalimeee anfusihim fa alqawus salama maa kunnaa na'malu min sooo'; balaaa innal laaha 'aleemum bimaa kuntum ta'maloon)

वे जिनकी जान निकालते हैं फ़रिश्ते [55] इस हाल में कि वे अपनी जानों पर ज़ुल्म कर रहे थे [56], तो वे उस वक़्त सुलह (इताअत) डालेंगे कि "हम तो कोई बुराई नहीं करते थे [57]।" हाँ क्यों नहीं! बेशक अल्लाह ख़ूब जानता है जो कुछ तुम करते थे [58]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 28 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"वे जिनकी जान निकालते हैं फ़रिश्ते [55] इस हाल में कि वे अपनी जानों पर ज़ुल्म कर रहे थे [56], तो वे उस वक़्त सुलह डालेंगे कि 'हम तो कोई बुराई नहीं करते थे [57]।' हाँ क्यों नहीं! बेशक अल्लाह ख़ूब जानता है जो कुछ तुम करते थे [58]।'"

[55] मलकुल-मौत और उनके मददगार फ़रिश्ते

मौत देना अल्लाह का काम है, मगर यहाँ फ़रिश्तों की तरफ़ निस्बत की गई क्योंकि वे अल्लाह के हुक्म के ताबेदार हैं। मलकुल-मौत हज़रत इज़्राईल अलैहिस्सलाम के साथ कई मददगार फ़रिश्ते होते हैं, इसलिए जमा का सेग़ा इस्तेमाल हुआ।

[56] ख़ातिमे का एतबार

इन्सान का एतबार उसके ख़ातिमे (मौत के वक़्त की हालत) पर है। अगर सारी उम्र काफ़िर रहा मगर मरते वक़्त सच्चा ईमान लाया तो मोमिन है; और अगर उम्र भर मोमिन रहा मगर मौत कुफ़्र पर हुई तो काफ़िर गिना जाएगा।

[57] मौत के वक़्त झूठा इनकार

मौत की हौलनाकी देखकर काफ़िर अपने गुनाहों से मुकरेंगे कि हमने कोई बुराई नहीं की थी।

[58] आजा व जवारेह की गवाही

अल्लाह तआला उनके हर अमल से बाख़बर है और क़यामत में उनके अपने हाथ-पाँव उनके ख़िलाफ़ गवाही देकर उनका मुँह बंद कर देंगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now