कुरान - 16:30 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
۞وَقِيلَ لِلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ مَاذَآ أَنزَلَ رَبُّكُمۡۚ قَالُواْ خَيۡرٗاۗ لِّلَّذِينَ أَحۡسَنُواْ فِي هَٰذِهِ ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةٞۚ وَلَدَارُ ٱلۡأٓخِرَةِ خَيۡرٞۚ وَلَنِعۡمَ دَارُ ٱلۡمُتَّقِينَ

Transliteration: (Wa qeela lillazeenat taqaw maazaaa anzala Rabbukum; qaaloo khairaa; lillazeena ahsanoo fee haazihid dunyaa hasanah; wa la Daarul Aakhirati khair; wa lani'ma daarul muttaqeen)

और डर वालों (परहेज़गारों) से कहा गया, "तुम्हारे रब ने क्या उतारा?" बोले, "भलाई [61]।" उन लोगों के लिए जिन्होंने इस दुनिया में भलाई की, भलाई है [62]; और बेशक आख़िरत का घर सबसे बेहतर है [63]। और क्या ही खूब घर है परहेज़गारों का! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 30 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और डर वालों से कहा गया, 'तुम्हारे रब ने क्या उतारा?' बोले, 'भलाई [61]।' उन लोगों के लिए जिन्होंने इस दुनिया में भलाई की, भलाई है [62]; और बेशक आख़िरत का घर सबसे बेहतर है [63]। और क्या ही खूब घर है परहेज़गारों का!"

[61] मोमिनीन की गवाही: 'ख़ैर' (भलाई)

हज के दिनों में जब बाहर के लोग सहाबा-ए-किराम से पूछते कि नबी पर क्या उतरा, तो सहाबा फ़रमाते: "ख़ैर (सरापा भलाई व रहमत)"। वे क़ुरआन की अज़मत और हुज़ूर ﷺ के अख़लाक़-ए-करीमाना का ज़िक्र फ़रमाते (ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)।

[62] दुनिया व आख़िरत में भलाई का सिला

जिन्होंने ईमान और नेक आमाल किए, उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त, सुकून और बरकतें अता होंगी, और आख़िरत में जन्नत की दायमी नेमतें मिलेंगी।

[63] आख़िरत के घर की अफ़ज़लियत

आख़िरत का घर दुनिया से कहीं बेहतर है क्योंकि वहाँ न कोई ग़म है, न मौत, न बीमारी और न कोई ज़वाल। यह बेहतरीन मक़ाम मुत्तक़ी और परहेज़गार बन्दों के लिए तैयार किया गया है।

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