Transliteration: (Wa qeela lillazeenat taqaw maazaaa anzala Rabbukum; qaaloo khairaa; lillazeena ahsanoo fee haazihid dunyaa hasanah; wa la Daarul Aakhirati khair; wa lani'ma daarul muttaqeen)
"और डर वालों से कहा गया, 'तुम्हारे रब ने क्या उतारा?' बोले, 'भलाई [61]।' उन लोगों के लिए जिन्होंने इस दुनिया में भलाई की, भलाई है [62]; और बेशक आख़िरत का घर सबसे बेहतर है [63]। और क्या ही खूब घर है परहेज़गारों का!"
हज के दिनों में जब बाहर के लोग सहाबा-ए-किराम से पूछते कि नबी पर क्या उतरा, तो सहाबा फ़रमाते: "ख़ैर (सरापा भलाई व रहमत)"। वे क़ुरआन की अज़मत और हुज़ूर ﷺ के अख़लाक़-ए-करीमाना का ज़िक्र फ़रमाते (ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)।
जिन्होंने ईमान और नेक आमाल किए, उन्हें दुनिया में भी इज़्ज़त, सुकून और बरकतें अता होंगी, और आख़िरत में जन्नत की दायमी नेमतें मिलेंगी।
आख़िरत का घर दुनिया से कहीं बेहतर है क्योंकि वहाँ न कोई ग़म है, न मौत, न बीमारी और न कोई ज़वाल। यह बेहतरीन मक़ाम मुत्तक़ी और परहेज़गार बन्दों के लिए तैयार किया गया है।
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