कुरान - 16:32 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
ٱلَّذِينَ تَتَوَفَّىٰهُمُ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةُ طَيِّبِينَ يَقُولُونَ سَلَٰمٌ عَلَيۡكُمُ ٱدۡخُلُواْ ٱلۡجَنَّةَ بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Allazeena tatawaf faahumul malaaa'ikatu taiyibeena yaqooloona salaamun 'alai kumud khulul Jannata bimaa kuntum ta'maloon)

वे जिनकी जान निकालते हैं फ़रिश्ते पाकीज़ा हालत में [65], फ़रिश्ते उनसे कहते हैं, "सलाम हो तुम पर [66], जन्नत में दाख़िल हो जाओ [67] अपने आमाल के बदले [68]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 32 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"वे जिनकी जान निकालते हैं फ़रिश्ते पाकीज़ा हालत में [65], फ़रिश्ते उनसे कहते हैं, 'सलाम हो तुम पर [66], जन्नत में दाख़िल हो जाओ [67] अपने आमाल के बदले [68]।'"

[65] पाकीज़ा ख़ातिमा

सच्चे मोमिन जब दुनिया से रुख़्सत होते हैं, तो उनका ख़ातिमा शिर्क और गुनाहों से पाकीज़गी की हालत में होता है।

[66] फ़रिश्तों का सलाम और बशारत

मौत के वक़्त ही रहमत के फ़रिश्ते उन्हें सलामती और जन्नत की ख़ुशख़बरी देते हैं जिससे मौत की तकलीफ़ उनके लिए राहत बन जाती है।

[67] जन्नत में दाख़िला

क़ब्र ही से मोमिन के लिए जन्नत की खिड़की खोल दी जाती है और वह जन्नत की नेमतों में पहुँच जाता है।

[68] आमाल और अल्लाह का फ़ज़्ल

अगरचे जन्नत अल्लाह के फ़ज़्ल से मिलती है, मगर आमाल उसका ज़ाहिरी सबब बनते हैं।

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