Transliteration: (Allazeena tatawaf faahumul malaaa'ikatu taiyibeena yaqooloona salaamun 'alai kumud khulul Jannata bimaa kuntum ta'maloon)
"वे जिनकी जान निकालते हैं फ़रिश्ते पाकीज़ा हालत में [65], फ़रिश्ते उनसे कहते हैं, 'सलाम हो तुम पर [66], जन्नत में दाख़िल हो जाओ [67] अपने आमाल के बदले [68]।'"
सच्चे मोमिन जब दुनिया से रुख़्सत होते हैं, तो उनका ख़ातिमा शिर्क और गुनाहों से पाकीज़गी की हालत में होता है।
मौत के वक़्त ही रहमत के फ़रिश्ते उन्हें सलामती और जन्नत की ख़ुशख़बरी देते हैं जिससे मौत की तकलीफ़ उनके लिए राहत बन जाती है।
क़ब्र ही से मोमिन के लिए जन्नत की खिड़की खोल दी जाती है और वह जन्नत की नेमतों में पहुँच जाता है।
अगरचे जन्नत अल्लाह के फ़ज़्ल से मिलती है, मगर आमाल उसका ज़ाहिरी सबब बनते हैं।
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