कुरान - 16:34 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
فَأَصَابَهُمۡ سَيِّـَٔاتُ مَا عَمِلُواْ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ

Transliteration: (Fa asaabahum saiyi aatu maa 'amiloo wa haaqa bihim maa kaano bihee yastahzi'oon (section 4))

तो उनकी बुराइयाँ उन पर आ पड़ीं [72] और जिस पर वे हँसते थे उसी ने उन्हें आ घेरा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 34 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"तो उनकी बुराइयाँ उन पर आ पड़ीं [72] और जिस पर वे हँसते थे उसी ने उन्हें आ घेरा।"

[72] गुनाहों का मुकम्मल वबाल

इन्सान जो बोता है वही काटता है। काफ़िरों की नाफ़रमानियाँ और मज़ाक़ उड़ाना ही उनके लिए अज़ाब की शक्ल में पलट आया और जिस अज़ाब को वे मज़ाक़ समझते थे, उसी ने उन्हें चारों तरफ़ से घेर लिया।

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