कुरान - 16:31 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
جَنَّـٰتُ عَدۡنٖ يَدۡخُلُونَهَا تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۖ لَهُمۡ فِيهَا مَا يَشَآءُونَۚ كَذَٰلِكَ يَجۡزِي ٱللَّهُ ٱلۡمُتَّقِينَ

Transliteration: (Jannaatu 'Adniny yadkhuloonahaa tajree min tahtihal anhaaru lahum feehaa maa yashaaa'oon; kazaalika yajzil laahul muttaqeen)

बसने के बाग़ (जन्नते अद्न) जिनमें वे दाख़िल होंगे, उनके नीचे नहरें बहती हैं, उनके लिए उसमें जो चाहें मौजूद है [64]। ऐसा ही सिला देता है अल्लाह परहेज़गारों को। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 31 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"बसने के बाग़ जिनमें वे दाख़िल होंगे, उनके नीचे नहरें बहती हैं, उनके लिए उसमें जो चाहें मौजूद है [64]। ऐसा ही सिला देता है अल्लाह परहेज़गारों को।"

[64] जन्नत में पाक ख़्वाहिशात की तकमील

जन्नत में मोमिन जिस नेमत की भी ख़्वाहिश करेगा, वह बिना किसी देरी और मशक़्क़त के उसके सामने हाज़िर होगी। अल्लाह तआला परहेज़गार बन्दों को उनकी पाकीज़ा ज़िन्दगी का ऐसा ही अज़ीम बदला अता फ़रमाता है।

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