कुरान - 16:29 सूरह अल-नहल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
فَٱدۡخُلُوٓاْ أَبۡوَٰبَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ فَلَبِئۡسَ مَثۡوَى ٱلۡمُتَكَبِّرِينَ

Transliteration: (Fadkhulooo abwaaba jahannama khaalideena feeha falabi'sa maswal mutakab bireen)

"अब जहन्नम के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ हमेशा उसमें रहने के लिए [59]। तो क्या ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरों (घमंडियों) का [60]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-नहल आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नह्ल – आयत 29 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"अब जहन्नम के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ हमेशा उसमें रहने के लिए [59]। तो क्या ही बुरा ठिकाना है मुतकब्बिरों का [60]!"

[59] दोज़ख़ की हमेशगी सिर्फ़ काफ़िरों के लिए

जहन्नम में हमेशा रहना सिर्फ़ काफ़िरों और मुशरिकों के लिए है। गुनहगार मोमिन चाहे कितना ही बड़ा गुनहगार हो, सज़ा भुगतने के बाद अल्लाह की रहमत और रसूलुल्लाह ﷺ की शफ़ाअत से निकाल कर जन्नत में दाख़िल किया जाएगा।

[60] तकब्बुर की हलाकत

तकब्बुर हलाकत का सबसे बड़ा ज़रिया है। अल्लाह के रसूल और उसके अहकाम के मुक़ाबले में अपनी बड़ाई जताना ही इन्सान को जहन्नम के सबसे निचले तबक़े में ढकेलता है।

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