कुरान - 53:13 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
وَلَقَدۡ رَءَاهُ نَزۡلَةً أُخۡرَىٰ

Transliteration: (Wa laqad ra aahu nazlatan ukhraa)

और बेशक उन्होंने उस जल्वा-ए-हक़ीक़ी को दूसरी बार भी देखा [16]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 13

"और बेशक उन्होंने उस जल्वा-ए-हक़ीक़ी को दूसरी बार भी देखा [16]!"


[16] मेअराज में बार-बार दीदार-ए-इलाही का शरफ़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'नज़लतन उख़रा' से मुराद दोबारा दीदार होना है:

  • नमाज़ों की कमी के वक़्त दीदार: शब-ए-मेअराज जब पचास नमाज़ों से पाँच नमाज़ें कराने के लिए हुज़ूर ﷺ हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के मश्वरे से बार-बार बारगाह-ए-इलाही में हाज़िर हुए, तो हर मर्तबा हुज़ूर ﷺ को अपने रब का दीदार हासिल हुआ।
  • मूसा (अलैहिस्सलाम) की तमन्ना: हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की तमन्ना-ए-दीदार भी इसी बहाने हुज़ूर ﷺ के ज़रिए पूरी होती रही।

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