कुरान - 53:14 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
عِندَ سِدۡرَةِ ٱلۡمُنتَهَىٰ

Transliteration: ('Inda sidratil muntaha)

सिदरतुल-मुन्तहा [17] (आख़िरी बेरी के दरख़्त) के पास! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 14

"सिदरतुल-मुन्तहा [17] (आख़िरी बेरी के दरख़्त) के पास!"


[17] सिदरतुल-मुन्तहा की हक़ीक़त और मक़ाम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'सिदरतुल-मुन्तहा' वह अज़ीम मक़ाम है जहाँ कायनात की हद ख़त्म होती है:

  • इंतिहाई सीमा: इसकी जड़ें छठे आसमान में और शाख़ें सातवें आसमान से भी ऊपर अर्श तक फैली हैं। इसे मुन्तहा (आख़िरी हद) इसलिए कहते हैं क्योंकि फ़रिश्तों, शोहदा की रूहों और तमाम मख़लूक़ात की रसाई की यही आख़िरी हद है।
  • नबी ﷺ का मुक़ाम: इस हद से आगे सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारे आक़ा व मौला हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ ही तशरीफ़ ले जा सके।

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