Transliteration: (Am lam yunabbaa bimaa fee suhuhfi Moosa)
"या उसे उस बात की ख़बर नहीं दी गई जो मूसा के सहीफ़ों में है [47]?"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) पर जो तौरात और सहीफ़े नाज़िल हुए, उनमें भी यही तौहीद और इंसाफ़ के अहकाम थे कि हर इंसान अपने आमाल का ख़ुद ज़िम्मेदार होगा।
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