कुरान - 53:35 सूरह अन-नज्म अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
أَعِندَهُۥ عِلۡمُ ٱلۡغَيۡبِ فَهُوَ يَرَىٰٓ

Transliteration: (A'indahoo 'ilmul ghaibi fahuwa yaraa)

क्या उसके पास ग़ैब का इल्म है कि वह (आख़िरत को) देख रहा है [46]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नज्म आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नज्म तफ़सीर - आयत 35

"क्या उसके पास ग़ैब का इल्म है कि वह (आख़िरत को) देख रहा है [46]?"


[46] ग़ैब के झूठे दावों का रद्द

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि यह आयत उन मुनकिरों की जहालत को ज़ाहिर करती है:

  • अज़ाब उठाने का झूठा दावा: क्या उस काफ़िर के पास ग़ैब का कोई ऐसा इल्म है कि वह आख़िरत में किसी दूसरे का अज़ाब अपने सर ले सकेगा? क़यामत में कोई किसी का गुनाह नहीं उठा सकेगा।

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