कुरान - 27:7 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
إِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِأَهۡلِهِۦٓ إِنِّيٓ ءَانَسۡتُ نَارٗا سَـَٔاتِيكُم مِّنۡهَا بِخَبَرٍ أَوۡ ءَاتِيكُم بِشِهَابٖ قَبَسٖ لَّعَلَّكُمۡ تَصۡطَلُونَ

Transliteration: (Iz qaala Moosaa li ahliheee inneee aanastu naaran sa'aateekum minhaa bikhabarin aw aateekum bishihaabin qabasil la'allakum tastaloon)

जब मूसा ने अपने घर वालों से कहा, 'मैंने एक आग देखी है [11]; मैं अनक़रीब वहाँ से तुम्हारे पास कोई ख़बर लाऊंगा [12], या कोई जलता हुआ अंगारा लाऊंगा ताकि तुम ताप सको [13]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 7

"जब मूसा ने अपने घर वालों से कहा, 'मैंने एक आग देखी है [11]; मैं वहाँ से कोई ख़बर लाऊंगा [12], या जलता अंगारा लाऊंगा ताकि तुम ताप सको [13]।'"

[11] वादी-ए-अयमन में नूर-ए-इलाही की तजल्ली

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम जब मदयन से मिस्र की तरफ़ अपनी अहलिया (हज़रत सफ़ूरा) के साथ सफ़र कर रहे थे, तो रात निहायत सर्द और अंधेरी थी। रास्ता भटक जाने के बाद आपको दूर कोह-ए-तूर पर एक आग चमकती हुई नज़र आई जो दरअस्ल आग नहीं बल्कि नूर-ए-इलाही का ज़हूर था।

[12] रास्ते की मालूमात की उम्मीद

आपने फ़रमाया कि शायद वहां कोई मुसाफ़िर या क़ाफ़िला हो जिससे मिस्र जाने के रास्ते की सही रहनुमाई मिल सके।

[13] शदीद सर्दी में अहल-ओ-अयाल की राहत की फ़िक्र

अगर कोई आदमी न मिला तो कम से कम एक जलता हुआ शोला या अंगारा ले आऊंगा ताकि इस ठंडी रात में आग ताप कर सर्दी से महफ़ूज़ रह सको। यह आपके अहल-ओ-अयाल के साथ हुस्न-ए-सुलूक की मिसाल है।

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