कुरान - 27:8 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
فَلَمَّا جَآءَهَا نُودِيَ أَنۢ بُورِكَ مَن فِي ٱلنَّارِ وَمَنۡ حَوۡلَهَا وَسُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Falammaa jaaa'ahaa noodiya am boorika man finnnnaari wa man hawlahaa wa Subhaanal laahi Rabbil 'aalameen)

फिर जब वे उसके पास आए, तो आवाज़ दी गई [14] कि, 'बा-बरकत है वह जो इस आग में (इसके ज़हूर के मुक़ाम पर) है और जो इसके आस-पास हैं [15]; और पाक है अल्लाह जो तमाम जहानों का रब है [16]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 8

"फिर जब वे उसके पास आए, तो आवाज़ दी गई [14] कि, 'बा-बरकत है वह जो इस आग में है और जो इसके आस-पास हैं [15]; और पाक है अल्लाह जो तमाम जहानों का रब है [16]!'"

[14] सब्ज़ दरख़्त से निदाए रब्बानी

हज़रत मूसा ने देखा कि एक सरसब्ज़ व शादाब बेरी या ऊनाब के दरख़्त में आग भड़क रही है मगर दरख़्त जल नहीं रहा बल्कि उसकी सब्ज़ी और चमक और बढ़ रही है। उसी दरख़्त की सिम्त से अल्लाह तआला ने बे-वास्ता हज़रत मूसा को निदा फ़रमाई।

[15] बरकत-ए-नूर और हाज़िरीन का शरफ़

'जो इस आग में है' से मुराद हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम हैं जो उस नूर के मरकज़ पर हाज़िर थे, और 'जो इसके आस-पास हैं' से मुराद मुक़द्दस फ़रिश्ते हैं जो उस वादी में तवाफ़ कर रहे थे। इससे साबित हुआ कि अल्लाह के मुक़द्दस मुक़ामात और बरगुज़ीदा बन्दों के पास बरकत नाज़िल होती है।

[16] तंज़ीह-ए-इलाही

अल्लाह तआला जिस्म, मक़ान, आग में हलूल करने या किसी मख़लूक़ से मुशाबहत रखने से बिल्कुल पाक व मुनज़्ज़ा है। वह सारी कायनात का रब्बुल आलमीन है।

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