कुरान - 27:6 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
وَإِنَّكَ لَتُلَقَّى ٱلۡقُرۡءَانَ مِن لَّدُنۡ حَكِيمٍ عَلِيمٍ

Transliteration: (Wa innaka latulaqqal Qur-aana mil ladun Hakeemin 'Aleem)

और बेशक (ऐ नबी!) आपको यह क़ुरआन उस ज़ात की तरफ़ से सिखाया जा रहा है जो बड़ी हिकमत वाली, सब कुछ जानने वाली है [10]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 6

"और बेशक आपको यह क़ुरआन उस ज़ात की तरफ़ से सिखाया जा रहा है जो हिकमत वाली, जानने वाली है [10]।"

[10] हुज़ूर अक़दस ﷺ का मुअल्लिम-ए-हक़ीक़ी ख़ुद अल्लाह तआला है

हुज़ूर अक़दस ﷺ का उस्ताद कायनात में कोई इंसान या फ़रिश्ता नहीं बल्कि ख़ुद अल्लाह तआला 'हकीम' और 'अलीम' है। अल्लाह ने अपने इल्म-ए-ला-मफ़हूम से अपने महबूब ﷺ को ऐसा कामिल इल्म अता फ़रमाया जो तमाम मख़लूक़ात के इल्म पर हावी है। हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम सिर्फ़ पैग़ाम पहुंचाने वाले ख़ादिम हैं, उस्ताद नहीं।

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