Transliteration: (Wa innaka latulaqqal Qur-aana mil ladun Hakeemin 'Aleem)
"और बेशक आपको यह क़ुरआन उस ज़ात की तरफ़ से सिखाया जा रहा है जो हिकमत वाली, जानने वाली है [10]।"
हुज़ूर अक़दस ﷺ का उस्ताद कायनात में कोई इंसान या फ़रिश्ता नहीं बल्कि ख़ुद अल्लाह तआला 'हकीम' और 'अलीम' है। अल्लाह ने अपने इल्म-ए-ला-मफ़हूम से अपने महबूब ﷺ को ऐसा कामिल इल्म अता फ़रमाया जो तमाम मख़लूक़ात के इल्म पर हावी है। हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम सिर्फ़ पैग़ाम पहुंचाने वाले ख़ादिम हैं, उस्ताद नहीं।
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