कुरान - 27:5 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَهُمۡ سُوٓءُ ٱلۡعَذَابِ وَهُمۡ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ هُمُ ٱلۡأَخۡسَرُونَ

Transliteration: (Ulaaa'ikal lazeena lahum sooo'ul 'azaabi wa hum fil Aakhirati humul akhsaroon)

ये वही लोग हैं जिनके लिए बुरा अज़ाब है [8], और आख़िरत में वही सबसे ज़्यादा ख़सारा (नुक़सान) उठाने वाले होंगे [9]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अन-नम्ल – आयत 5

"ये वही लोग हैं जिनके लिए बुरा अज़ाब है [8], और आख़िरत में वही सबसे ज़्यादा नुक़सान उठाने वाले होंगे [9]।"

[8] दुनिया और बरज़ख़ का बुरा अज़ाब

दुनिया में ज़िल्लत, रुसवाई और शिकस्त, मौत के वक़्त रूह निकलने की सख़्ती और क़ब्र में आग व तंगहाली का अज़ाब उनका मुक़द्दर है।

[9] आख़िरत में मुकम्मल ख़सारा और हसरत

क़ियामत के दिन वे सबसे बड़े ख़सारे में होंगे क्योंकि उनकी उम्र भर की कोशिशें बेकार गईं, उनके नेक आमाल कुफ़्र की वजह से ज़ाया हो गए और उन्हें हमेशा की दोज़ख़ में डाल दिया गया।

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