Transliteration: (Allazeena yuqeemoonas Salaata wa yu'toonaz Zakaata wa hum bil Aakhirati hum yooqinoon)
"जो नमाज़ क़ायम करते हैं [3] और ज़कात अदा करते हैं [4], और वे आख़िरत पर कामिल यक़ीन रखते हैं [5]।"
नमाज़ क़ायम करने का मतलब यह है कि उसके तमाम अरकान, शराइत, मुस्तहब्बात और हुज़ूरी-ए-क़ल्ब के साथ वक़्त पर बा-जमाअत अदा की जाए और अमली ज़िन्दगी में बुराई व बेहयाई से बचा जाए।
वे अपने पाक माल से ख़ुशी-ख़ुशी मुस्तहिक़्क़ीन को ज़कात देते हैं और इसे अल्लाह का एहसान समझते हैं कि उसने उन्हें देने वाला बनाया, लेने वाला नहीं।
वे मरने के बाद दोबारा ज़िन्दा होने, आमाल के हिसाब-किताब, मीज़ान, पुल-सिरात और जन्नत व दोज़ख़ पर ऐसा पुख़्ता यक़ीन रखते हैं गोया अपनी आंखों से देख रहे हों।
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