Transliteration: (Innal lazeena laa yu'minoona bil Aakhirati zaiyannaa lahum a'maalahum fahum ya'mahoon)
"बेशक जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, हमने उनके आमाल को ख़ुशनुमा बना दिया है [6], पस वे भटकते फिरते हैं [7];"
जो लोग आख़िरत का इंकार करते हैं, उनकी सज़ा यह होती है कि उनके बुरे और मुफ़्सिद काम भी उन्हें बहुत अच्छे और अक़्लमंदी वाले दिखाई देते हैं। वे अपनी गुमराही को ही तरक़्क़ी और कामयाबी समझते हैं।
वे शक, तरद्दुद और गुमराही के अंधेरों में अंधे होकर ठोकरें खाते फिरते हैं और उन्हें सुकून-ए-क़ल्ब की दौलत कभी नसीब नहीं होती।
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