Transliteration: (Wa laa tahzan 'alaihim wa laa takun fee daiqin mimmaa yamkuroon)
"और आप उन पर ग़म न कीजिए [135], और न उनके फ़रेब और साज़िशों से तंगदिल (परेशान) हूजिए [136]।"
हुज़ूर रहमत-ए-आलम ﷺ मख़लूक़ पर बेपनाह शफ़क़त रखते थे और काफ़िरों के कुफ़्र व हलाकत पर भी रंजीदा होते थे। अल्लाह तआला ने तसल्ली दी कि आप इन हठधर्मियों के अंजाम पर ग़मगीन न हों, क्योंकि जो जानबूझकर हक़ से मुंह मोड़ते हैं वे अज़ाब ही के मुस्तहिक़ हैं।
यानी काफ़िरों की गुप्त साज़िशें और इस्लाम के ख़िलाफ़ तदबीरें हरगिज़ कामयाब नहीं होंगी। अल्लाह तआला अपने रसूल ﷺ का मुहाफ़िज़ व मददगार है, इसलिए उनके मंसूबों से दिल तंग न फ़रमाएं।
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