कुरान - 27:70 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
وَلَا تَحۡزَنۡ عَلَيۡهِمۡ وَلَا تَكُن فِي ضَيۡقٖ مِّمَّا يَمۡكُرُونَ

Transliteration: (Wa laa tahzan 'alaihim wa laa takun fee daiqin mimmaa yamkuroon)

और आप उन पर ग़म न कीजिए [135], और न उनके फ़रेब और साज़िशों से तंगदिल (परेशान) हूजिए [136]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 70

"और आप उन पर ग़म न कीजिए [135], और न उनके फ़रेब और साज़िशों से तंगदिल (परेशान) हूजिए [136]।"

[135] काफ़िरों की हलाकत पर रंज न फ़रमाना

हुज़ूर रहमत-ए-आलम ﷺ मख़लूक़ पर बेपनाह शफ़क़त रखते थे और काफ़िरों के कुफ़्र व हलाकत पर भी रंजीदा होते थे। अल्लाह तआला ने तसल्ली दी कि आप इन हठधर्मियों के अंजाम पर ग़मगीन न हों, क्योंकि जो जानबूझकर हक़ से मुंह मोड़ते हैं वे अज़ाब ही के मुस्तहिक़ हैं।

[136] मुशरिकीन के मक्र व फ़रेब से बेख़ौफ़ रहना

यानी काफ़िरों की गुप्त साज़िशें और इस्लाम के ख़िलाफ़ तदबीरें हरगिज़ कामयाब नहीं होंगी। अल्लाह तआला अपने रसूल ﷺ का मुहाफ़िज़ व मददगार है, इसलिए उनके मंसूबों से दिल तंग न फ़रमाएं।

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