कुरान - 27:68 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

68
لَقَدۡ وُعِدۡنَا هَٰذَا نَحۡنُ وَءَابَآؤُنَا مِن قَبۡلُ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّآ أَسَٰطِيرُ ٱلۡأَوَّلِينَ

Transliteration: (Laqad wu'idnaa haazaa nahnu wa aabaaa'unaa min qablu in haazaaa illaaa asaateerul awwaleen)

बेशक यह वादा हमसे भी किया गया और इससे पहले हमारे बाप-दादा से भी; यह तो बस अगलों की मनगढ़ंत कहानियाँ (अफ़साने) हैं [133]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 68 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 68

"बेशक यह वादा हमसे भी किया गया और इससे पहले हमारे बाप-दादा से भी; यह तो बस अगलों की मनगढ़ंत कहानियाँ (अफ़साने) हैं [133]!'"

[133] क़ियामत के आने में ताख़ीर को इनकार का सबब बनाना

यानी पहले अंबिया-ए-किराम ने भी हमारे बुज़ुर्गों को क़ियामत और अज़ाब से डराया था, मगर चूंकि अब तक वह नहीं आई, इसलिए मुशरिकीन ने इसे महज़ पुराने लोगों के क़िस्से-कहानियाँ क़रार दे दिया। वे यह न समझे कि अल्लाह की हिकमत में हर काम का एक मुक़र्ररा वक़्त तय है।

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