कुरान - 27:66 सूरह अन-नम्ल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
بَلِ ٱدَّـٰرَكَ عِلۡمُهُمۡ فِي ٱلۡأٓخِرَةِۚ بَلۡ هُمۡ فِي شَكّٖ مِّنۡهَاۖ بَلۡ هُم مِّنۡهَا عَمُونَ

Transliteration: (Balid daaraka 'ilmuhum fil Aakhirah; bal hum fee shakkin minhaa bal hum minhaa 'amoon (section 5))

क्या आख़िरत के बारे में उनका इल्म मुकम्मल हो चुका है [130]? बल्कि वे इस बारे में शक में पड़े हैं, बल्कि वे इससे बिल्कुल अंधे हैं [131]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नम्ल आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अन-नम्ल तफ़सीर - आयत 66

"क्या आख़िरत के बारे में उनका इल्म मुकम्मल हो चुका है [130]? बल्कि वे इस बारे में शक में पड़े हैं, बल्कि वे इससे बिल्कुल अंधे हैं [131]!"

[130] मालूमात के नाम पर सिर्फ़ इस्तिहज़ा

यानी ये लोग आख़िरत की तारीख़ और वक़्त पूछकर कोई सच्ची तफ़्तीश या इल्म हासिल नहीं करना चाहते, बल्कि सिर्फ़ मज़ाक़ और इनकार के तौर पर सवालात करते हैं। उनका इल्म आख़िरत की हक़ीक़त तक पहुंच ही नहीं सका।

[131] आख़िरत से रूहानी अंधापन

यानी जो शख़्स मौत और क़ियामत की तैयारी नहीं करता वह गोया आख़िरत से अंधा है। मुशरिकीन की आँखें दुनियावी चीज़ों को तो देखती हैं मगर आख़िरत के मामले में उनके दिलों पर पर्दा पड़ा हुआ है और वे बिल्कुल बे-बसीरत हैं।

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