Transliteration: (Balid daaraka 'ilmuhum fil Aakhirah; bal hum fee shakkin minhaa bal hum minhaa 'amoon (section 5))
"क्या आख़िरत के बारे में उनका इल्म मुकम्मल हो चुका है [130]? बल्कि वे इस बारे में शक में पड़े हैं, बल्कि वे इससे बिल्कुल अंधे हैं [131]!"
यानी ये लोग आख़िरत की तारीख़ और वक़्त पूछकर कोई सच्ची तफ़्तीश या इल्म हासिल नहीं करना चाहते, बल्कि सिर्फ़ मज़ाक़ और इनकार के तौर पर सवालात करते हैं। उनका इल्म आख़िरत की हक़ीक़त तक पहुंच ही नहीं सका।
यानी जो शख़्स मौत और क़ियामत की तैयारी नहीं करता वह गोया आख़िरत से अंधा है। मुशरिकीन की आँखें दुनियावी चीज़ों को तो देखती हैं मगर आख़िरत के मामले में उनके दिलों पर पर्दा पड़ा हुआ है और वे बिल्कुल बे-बसीरत हैं।
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